जलालपुर (अम्बेडकरनगर)।
पवित्र स्थल करबलाई हिन्द बड़ी दरगाह एक बार फिर इंसानियत, भाईचारे और सेवा की मिसाल बन गया, जब “राहे निजात ग्रुप” के तत्वावधान में एक भव्य और ऐतिहासिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का ऐसा कारवां था जिसने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार कर दिया।
शिविर में जलालपुर, मुस्तफाबाद, नागपुर, नई बाज़ार, जाफराबाद और उस्मानपुर सहित आसपास के गांवों व कस्बों से बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सुबह से ही दरगाह परिसर में सेवा, समर्पण और जोश का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ ख्वाजा शफात हुसैन ने किया। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने कहा कि रक्तदान सबसे बड़ी इंसानी सेवा है और एक यूनिट रक्त कई जिंदगियों को नया जीवन दे सकता है। उनके शब्दों ने उपस्थित युवाओं में नई ऊर्जा और संकल्प का संचार किया।
इस शिविर में कुल 43 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। रक्तदाताओं में आरजू अब्बास, डॉ. अली हसन, मौलाना आबिद नजमी, बिलाल, तंजीम फातिमा, हज़रा हैदरी, मोहम्मद जावेद, ज़मान, मोहम्मद आसिम, मोहम्मद रियाज़, कमर अब्बास, मोहम्मद अब्बास, अमीन, मोहम्मद मेहंदी सहित अनेक समाजसेवियों ने भाग लेकर यह संदेश दिया कि जब बात इंसानियत की हो, तो युवा सबसे आगे खड़े होते हैं।
“राहे निजात ग्रुप” जलालपुर का एक सक्रिय और समर्पित सामाजिक संगठन है, जो आपातकालीन रक्त उपलब्ध कराने, मरीजों की सहायता करने और जरूरतमंदों की आर्थिक मदद के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। यह संगठन युवाओं को केवल जोड़ता ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज सेवा की दिशा भी देता है।
इस अवसर पर संस्थापक व अध्यक्ष, हुसैनी सोशल फ्रंट रेहान ज़ैदी की रहनुमाई और प्रेरणा विशेष रूप से सराहनीय रही। उनके साथ मौलाना रहबर रज़ा सुल्तानी, मौलाना मीसम रज़ा जदीदी, मौलाना मुशीर, मास्टर मोहम्मद मेहंदी, बब्बी और आसिम ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं मोहम्मद अब्बास अमीन, मुंतज़िर, कुमैल, औन करबलाई, कलीम, मीसम, राजू और शब्बर ने व्यवस्थाओं को संभालते हुए अनुकरणीय योगदान दिया।
राहे निजात टीम ने सभी रक्तदाताओं, सहयोगियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों और प्रशासन का दिली आभार व्यक्त किया। टीम ने स्पष्ट किया कि सेवा का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है—भविष्य में भी ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि कोई भी जरूरतमंद रक्त के अभाव में पीड़ा न सहे।
यह आयोजन केवल एक शिविर नहीं, बल्कि एक संदेश था—
इंसानियत जिंदा है, और हमारे युवा उसके सबसे बड़े प्रहरी हैं।
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