बदोसराय (किंतूर): यौमे क़ुद्स पर हुआ एहतेजाजी कार्यक्रम, फ़िलिस्तीन के मज़लूमों के समर्थन में उठी आवाज़
रमज़ान के मुबारक महीने के आख़िरी जुमे के मौके पर बदोसराय की शिया जामा मस्जिद में यौमे क़ुद्स के अवसर पर एक प्रभावशाली एहतेजाजी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की क़ियादत इमाम-ए-जुमा जनाब मज़ाहिर हुसैन साहब ने की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और फ़िलिस्तीन के मज़लूमों के साथ एकजुटता का इज़हार करते हुए हर साल की तरह इस वर्ष भी ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने का अहद (संकल्प) लिया गया।
यौमे क़ुद्स क्या है
यौमे क़ुद्स हर साल रमज़ान के आख़िरी जुमे को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पूरी दुनिया को फ़िलिस्तीन और मस्जिद-ए-अक़्सा की आज़ादी तथा वहाँ के मज़लूम लोगों के समर्थन के लिए जागरूक करना है।
इस दिन की शुरुआत 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद सैय्यद रूहुल्लाह ख़ुमैनी हिंदी ने की थी, ताकि मुसलमानों के साथ-साथ इंसानियत-पसंद लोग भी यरुशलम (क़ुद्स) और फ़िलिस्तीन के पीड़ित लोगों के हक़ में आवाज़ उठा सकें।
आयोजकों का बयान
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. रेहान काज़मी (रसूलपुर) ने अपने संबोधन में कहा कि:
“हम फ़िलिस्तीन के मज़लूमों के हक़ में अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे। जब तक मस्जिद-ए-अक़्सा आज़ाद नहीं हो जाती, तब तक दुनिया भर के इंसाफ़-पसंद लोगों का यह फ़र्ज़ है कि वह ज़ुल्म के ख़िलाफ़ खड़े रहें।”
उन्होंने कहा कि यौमे क़ुद्स केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि इंसाफ़, इंसानियत और मज़लूमों के समर्थन का पैग़ाम है।
कार्यक्रम के अंत में फ़िलिस्तीन के लोगों की आज़ादी, अमन और दुनिया में इंसाफ़ कायम होने के लिए दुआ की गई।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से अफ़सर अब्बास किंतूरी, सफदर अब्बास किंतूरी, आदिल काज़मी किंतूरी,अली हैदर, अज़ादार अब्बास, मोनिस मियां ,मोहम्मद मिया सहित बड़ी संख्या में मोमिनीन मौजूद रहे।
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