कारगिल/लद्दाख। वरिष्ठ राजनीतिक नेता क़मर अली अख़ून साहिब के निधन से लद्दाख, विशेषकर कारगिल क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को जनसेवा और राजनीतिक जीवन की एक युगांतकारी क्षति माना जा रहा है।
लद्दाख के लोकसभा सदस्य श्री हनीफा जान तथा सोशल एक्टिविस्ट श्री सज्जाद करगिली ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि क़मर अली अख़ून का जाना केवल एक वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती का निधन नहीं, बल्कि कारगिल की एक मार्गदर्शक शक्ति का बिछुड़ जाना है। उन्होंने अपना पूरा जीवन कारगिल के लोगों की बेहतरी, सम्मान और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था।
उन्होंने कहा कि अख़ून साहिब हमेशा गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के साथ मजबूती से खड़े रहे। वे उनके संघर्षों को अपना संघर्ष मानते थे और हर मंच पर उनकी आवाज़ बुलंद करते थे। उनके निधन से लद्दाख और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बड़ी शून्यता उत्पन्न हो गई है।
अपने सार्वजनिक जीवन में क़मर अली अख़ून ने कारगिल से विधायक (MLA) के रूप में सेवा दी, पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे तथा लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) कारगिल के प्रथम मुख्य कार्यकारी पार्षद (Chief Executive Councillor) के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। शासन, आधारभूत संरचना, जनकल्याण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में उनके योगदान को सदैव याद किया जाएगा।
लोकसभा सदस्य श्री हनीफा जान ने कहा कि कारगिल ने अपना सच्चा सपूत खो दिया है, जबकि सोशल एक्टिविस्ट श्री सज्जाद करगिली ने इसे व्यक्तिगत रूप से अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि उनकी सादगी, ईमानदारी और निर्भीक नेतृत्व हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
दोनों नेताओं ने दिवंगत आत्मा की मग़फ़िरत की दुआ करते हुए परिजनों एवं समर्थकों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि क़मर अली अख़ून की विरासत सदैव कारगिल और लद्दाख को मार्गदर्शन देती रहेगी।
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